धान खरीदी में किसानों के साथ छल किया सरकार और प्रशासन ने-शशि सिंह

 

सूरजपुर/छत्तीसगढ़ सरकार के किसानों के एक-एक दाना धान खरीदने के दावों की पोल खोलते हुए सूरजपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने दावा किया है कि जिले में हजारों किसान अभी भी धान बिक्री से वंचित रह गए और उन्होंने राज्य सरकार व जिला प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि हम इन वंचित किसानों के साथ मिलकर प्रशासन को ज्ञापन भी देंगे और जरूरत पडी तो सड़क पर उतर अन्नदाता के हित में बड़ा आंदोलन भी करेंगे। उन्होंने बात करते हुए बताया कि वंचित किसानों का आंकड़ा मामूली आंकड़ा नहीं, वरन बहुत बड़ा आंकड़ा है जो किसान दिन रात एक करके अपनी फसल का उत्पादन करता है और अंत में उसे अपने धान को बेचने के लिए प्रशासन के विभिन्न पैमानों पर खरा उतरने पर असफलता के बाद धान बेचने से वंचित रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में इन किसानों की सुध लेने ना तो सरकार का कोई अमला है ना ही कोई प्रशासनिक नुमाइंदा। जो इन किसानों के सहयोग में खड़ा मिले बल्कि अधिकारियों के ऊपर किसानों का रकबा कटौती और रकबा सरेंडर कराने का दबाव है। जिससे भी किसान परेशान रहा है। ऐसी स्थिति में पूरी जिला कांग्रेस पार्टी इन किसानों के साथ खड़ी है और जिस भी रूप में कांग्रेस पार्टी की जरूरत किसानों को पड़ेगी पूरी कांग्रेस पार्टी उन किसानों के साथ हैं। इस वर्ष जिस प्रकार से किसानों का शोषण किया गया है सर्वप्रथम खाद की कमी, उसके बाद रकबा कटौती, रकवा कटौती के बाद अंत में सब होने के बाद टोकन समय सीमा ईतना कम किया गया कि किसानों को टोकन से वंचित रहना पड़ गया। परिणाम स्वरुप वह किसान आज धान बेचने की स्थिति पर ही नहीं है। यह छत्तीसगढ़ बनने के बाद से किसानों के ऊपर होने वाला सबसे बड़ा हमला है। समितियों और मंडियो में किसान परेशान रहे है।शशि सिंह ने आरोप लगाया कि पहले से ही निर्देशित था कि कम धान खरीदना है। यह अन्नदाता किसानों के साथ अन्याय है और बड़ा कुठाराघात है। महतारी वंदन के लिए पैसे बचाने का अंदरखाने में हो रहा है। धान खरीदी में सरकार को विफल करार देते हुए कांग्रेस नेत्री ने भाजपा सरकार और प्रशासनिक अमले पर प्रश्नचिन्ह लगाया है।

समिति-मंडी में रहा अव्यस्था का आलम

समितियों व मंडियो में अव्यवस्था के आलम के बीच धान खरीदी अब बंद हो गई है।किसान अपनी उपज लेकर रात-रात भर समितियों में रहे है। तौल ज्यादा लिया गया, हमाली के पैसे लिए गए,रकबा काटा गया, एग्रिस्टेग की समस्या रही, किसान तासिलो के चक्कर लगाते रहे। इस वर्ष धान खरीदी के आलम से किसान परेशान और हलाकान रहे।

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